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शाबाश व दुत शब्दों के पीछे छिपा मनोविज्ञान

Voice By Sangya Tandon
February 19, 2026 5:21 PM

हमारे जीवन में बोले गए शब्द सिर्फ आवाज़ नहीं होते, बल्कि वे सामने वाले के मन, आत्मविश्वास और सोच पर गहरा प्रभाव डालते हैं। कभी कोई हमें “शाबाश” कह देता है, तो हम खुद को मजबूत और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित महसूस करते हैं। वहीं जब कोई “दुत” कहकर हमें नकारता है, तो हमारे भीतर निराशा और हताशा पैदा हो जाती है।

यह रेडियो कार्यक्रम “शाबाश व दुत” उन्हीं दो छोटे लेकिन असरदार शब्दों की ताकत को समझाने का प्रयास है। इस ऑडियो के माध्यम से हम जानेंगे कि कैसे प्रशंसा किसी व्यक्ति को आगे बढ़ने की ऊर्जा देती है और कैसे अपमान किसी के आत्मसम्मान को तोड़ सकता है।

कार्यक्रम में रोज़मर्रा की ज़िंदगी से जुड़े उदाहरणों के ज़रिए बताया गया है कि माता-पिता, शिक्षक, दोस्त और समाज के लोग जब सही शब्दों का इस्तेमाल करते हैं, तो वे किसी का भविष्य संवार सकते हैं। वहीं गलत शब्द किसी के सपनों को रोक भी सकते हैं।

यह प्रस्तुति हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि हम दूसरों से बात करते समय कितने संवेदनशील हैं। क्या हम अपने शब्दों से किसी को हौसला दे रहे हैं या अनजाने में उसे दुख पहुँचा रहे हैं?

“शाबाश व दुत” सिर्फ एक ऑडियो नहीं, बल्कि आत्ममंथन का माध्यम है, जो हमें सिखाता है कि शब्दों का सही उपयोग करके हम एक बेहतर, सकारात्मक और संवेदनशील समाज बना सकते हैं।

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